Wednesday, 15 April 2015

एक अकेला फूल : Ek Akela Phool

                            एक अकेला फूल
एक नन्हा प्यारा दुलारा फूल
अकेला अकेला ही  मुस्कुराए
बहारों में अकेला ही गुनगुनाए  
मस्ती में अपनी  झूम झूम जाए.... झूम झूम जाए
                           एक नन्हा प्यारा दुलारा फूल ......
किरणों के रथ पर
जब सूरज निकले
फूल उसकी और लपके
चटकीले रंग बिखराए
पर सूरज उससे न बतियाए
छोड़ फूल  को अकेला
चलता जाए ... चलता जाए
                       एक नन्हा प्यारा दुलारा फूल ......
तारों की बारात संग
चंदा जब निकले
फूल कोमल चंदा को पुकारे
कोमल पंखुडियां हिलाए  
पर चंदा फूल को न निहारे
छोड़ फूल  को अकेला
आगे निकल जाए ... आगे निकल जाए

                    एक नन्हा प्यारा दुलारा फूल.....
बहती हवा जब
फूल को सहलाए
फूल खुश हो जाए
भीनी खुशबु उडाए
पर हवा आगे उडती जाए
फूल संग न गुनगुनाये
छोड़ फूल  को अकेला
उड़ उड़ जाए ... उड़ उड़ जाए

                      एक नन्हा प्यारा दुलारा फूल .......

नदिया भी मस्ती में
जब ठन्डे  छींटे उडाए
फूल मचल मचल जाए  
पर नदिया आगे बहती जाए
फूल संग न गुनगुनाये
छोड़ फूल  को अकेला
बहती ही जाए .. बहती ही जाए

                    एक नन्हा प्यारा दुलारा फूल.....

किस से  करे बाते
किसे अपना दुखड़ा सुनाए
कोई न रुके उसके संग
सब आगे निकल जाए
फूल संग न गुनगुनाये
छोड़ फूल  को अकेला
आगे निकल जाए
 एक नन्हा प्यारा दुलारा फूल.......
अकेला अकेला ही  मुस्कुराए
बहारों में अकेला ही गुनगुनाए  
मस्ती में अपनी  झूम झूम जाए.... झूम झूम जाए

                                                रचना : प्रकाश गौतम


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