Saturday, 28 March 2020

देवी सूक्तम : DEVI SOOKTAM

इस समय सम्पूर्ण विश्व में कोरोनावायरस नाम की व्याधि व्याप्त है। चीन से शुरु हुई यह व्याधि इरानइटलीफ्रांसपुर्तगालजर्मनीइंग्लैंडसपेनअमेरिका आदि देशोँ मेँ तबाही मचा रही है। भारत मेँ भी यह व्याधि तेजी से अपने पैर पसार रही है। सोशल डिस्टैंसिंग के चलते सम्पूरण भारत में 21 दिन का लौक-डाउन भारत सरकार  के द्वारा लागू किया जा चुका है। भारत के विभिन्न राज्योँ मेँ कोरोनावायरस के प्रसार के चलते कर्फ्यु लागू किया जा चुका है। सब लोग घरोँ के अंदर ही रह रहे हैं। आजकल नवरात्रे भी चल रहे हैं परंतु लौक-डाउन के चलते सभी मंदिर भी बंद है। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिये यह अत्यंत आवश्यक भी है। तब हम क्या करे ?  माता के नौ रूपोँ की अराधना कैसे करेँ ? मैं इस ब्लोग पोस्ट में तंत्रोक्त देवी सूक्तम लिख रहा हूँ। सब लोग प्राता: सायँ: अपने परिवार सहित इस देवी सूक्तम का पाठ करेँ। ऐसा करने से सबका कल्याण होगा। देवी माता की कृपा से प्रत्येक व्यक्तिप्रत्येक परिवार और सम्पूर्ण देश को विशेष शक्ति प्राप्त होगी। प्रत्येक घर मेँ देवी सूक्तम का पाठ होने से नवीन ऊर्जा का संचार होगा। देवी सूक्तम का पाठ करते समय यह कल्पना करते रहेँ कि आपके चारोँ ओरआप के परिवार के चारोँ ओर एक शक्ति एक आभा मंडल का संचार हो रहा है। अपने साथ ही यह प्रार्थना भी करेँ कि हमारे देश और पूरे विश्व के उपर जो कोरोनावायरस नाम की महामारी आफत के रूप मेँ आई है उसका शीघ्र नाश हो।

अपने घर मेँ मात्र दीपक जला कर ही देवी की अराधना करेँ। जब तक कोरोना वायरस समाप्त नही हो जाता तब तक धूप और अगरबत्ती न जलाएँ ताकि किसी प्रकर का प्रदूषण न हो और गला आदि खराब न हो।

इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से जो दिशा निर्देश कोरोना वायरस से बचने बारे जारी किये जायेँ, उनका पालन किया जाये।
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                    देवी सूक्तम
नमो देव्यै  महादेव्यै  शिवायै  सततँ  नम:।
नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणत: स्म ताम्॥

रौद्रायै नमो नित्यायै गौर्यै धात्र्यै नमो नम:।
ज्योत्स्नायै चेंदुरूपिण्यै सुखायै सततँ नम:॥

कल्याण्यै प्रणताँ वृध्ये सिध्ये कुर्मो नमो नम:।
नैऋत्यै भूभृताँ    लक्षम्यै शर्वाण्यै ते नमो नम:॥

दुर्गायै दुर्गपारायै    सारायै   सर्वकारिण्यै।
ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततँ नम:॥

अति सौम्यै अति रौद्रायै नतास्तस्यै नमो नम:।
नमो जगत प्रतिष्ठायै देव्यै कृत्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु    विष्णुमायेति शब्दिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु       चेत्नेत्यभिधीयेते।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धि रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु    निद्रा रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु    क्षुधा रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु   छायारूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु तृष्णा रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु क्षांति रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु जाति रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु लज्जा रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु शांति रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धा रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु कांति रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु    वृति रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु स्मृति रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु   दया रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टि रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु   मातृ रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

या देवी सर्वभूतेषु भ्रांति रूपेण संस्थिताम।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

इंद्रियाणाम अधिष्ठात्रि भूतानाँ चाखिलेषु या।
भूतेषु सततँ तस्यै व्याप्तिदेव्यै नमो नम:

चिति रूपेण या कृत्स्न्मेतद्व्याप्य स्थिता जगत्।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै  नमस्तस्यै  नमो  नम:॥

 स्तुता सुरै: पुर्वमभिष्ट सँश्रया तथा सुरेंद्रेण दिनेषु सेविता।
करोतु सा न: शुभहेतुरेश्वरी शुभानि भद्राण्यभिहंतु चापद:॥
  या साम्प्रतँ चोद्धत देत्यातापितै रश्माभिरिशा च सुरैर्नमस्यते 
    या च स्मृता तत्क्षण्मेव हंति न: सर्वापदो भक्ति विनम्रमूर्तिभि॥

                                                      ॐ शान्ति:   शान्ति:  शान्ति:  ॥           
                                                                     ***
                               महामारी नाश हेतु मंत्र:
                                  
   मंत्र: -    जयंती   मंगला   काली  भद्रकाली कपालिनी । दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते ॥

 मंत्र: - ॐ देवी  प्रसन्नार्तिहरे प्रसीद  प्रसीद  मातर्जगतोअखिलस्य ।
             प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वम त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥

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