Thursday, 9 April 2020

Sodium-Hypochlorite: A fast virus disinfectant : सोडियम-हाईपोक्लोराईट: एक तीव्र विषाणु नाशक कैमिकल


जब से कोरोना वायरस का संक्रमण दुनिया भर मेँ हुआ है और विभिन्न देशोँ मेँ असंख्य लोग काल कवलित हो चुके हैँ, तब से हर कोई कोरोना वायरस से भयभीत है।

भारत मेँ भी सरकार  के द्वारा सोशल डिसटेंसिग जैसे कारगर उपाय अपना कर इस कोरोना वायरस के उपर लगाम लगाने का प्रयत्न किया गया है जो बहुत अधिक सफल भी रहा है। रेडियो, टेलीविजन, समाचार पत्रोँ के माध्यम से भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है कि इस वायरस के संक्रमण से बचने के लिए और प्रसार को रोकने के लिए लोग अपने आप को अपने घरोँ के अंदर ही 21 दिन तक सीमित रखेँ; बार-बार साबुन पानी से हाथ धोएँ; यदि साबुन पानी उपलब्ध न हो तो 60 प्रतिशत से उपर की सांद्रता (concentration) वाले सेनीटाईजर से अपने हाथ साफ करते रहेँ; दो व्यक्ति आपस मेँ कम से कम एक मीटर या तीन फुट की दूरी रखेँ; मास्क का मुहँ और नाक के उपर लगातार प्रयोग करेँ; सड़्क, रास्तोँ या खुले मेँ न थूकेँ, खांसी या छीँक आने पर रूमाल, टिशु पेपर, मास्क या कोहनी का अंदरूनी हिस्सा नाक पर लगा कर छीँके।

इन उपायोँ का बहुत ही अधिक सकारात्मक असर आम जन-मानस पर हुआ है। इन उपायोँ को लगातार अपनाने की आवश्यकता है। न सिर्फ 21 दिनोँतक अपितु इन क्रिया-क्लापोँ को हर व्यक्ति को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बना लेना चहिये।

परंतु ये सब तो वक्तिगत सफाई के उपाय हैँ। कोरोना वायरस के जो विषाणु बाहरी वातावरण मेँ हैँ उनको भी समाप्त करने की नितांत आवश्यकता है। तभी तो इस कोरोना वायरस का समूल नाश हो सकेगा। जब तक वातावरण मेँ फैले कोरोना वायरस की समूल नाश नहीँ होगा, तब तक नये सिरे से इसके संक्रमण का खतरा बना ही रहेगा। इस वायरस को  जड़ को समाप्त करना आवश्यक है।

कोरोना वायरस को बाहरी वातावरण मेँ ही समाप्त करने के लिये सोडियम हाईपोक्लोराईट नामक रसायन अत्यंत प्रभवाकारी है। यह रसायन सुनहरी पीलापन लिये हुए पानी के जैसा दिखाई देता है। यह रसायन केवल बाहरी वातावरण को सेनेटाईज करने के लिये है क्योंकि यह क्लोरीन युक्त होने के कारण जहरीला होता है। अतैव  इस रसायन  को किसी भी हालत मेँ न तो चखा जाए और न ही सूंघा जाए।

सोडियम हाईपोक्लोराईट का रासायनिक फर्मूला NaOCl है जिसकी pH value इसके घनत्व के अनुसार 10 से ले कर 14 तक होती है। यदि किसी रसायन की pH value 7 से 0 तक होती है तो वह एसिडिक या खट्टा होता है। 7 pH value न्युट्रल होती है अर्थात बेस्वाद। जितनी pH value 7 से नीचे 0 तक गिरेगी उतना ही कोई रसायन तेज एसिड होता जाएगा। 7 pH value से उपर जितनी pH value 14 तक बढ़्ती जाएगी उतना ही वह रसायन कड़्वा होता जाएगा। अतैव सोडियम-हाईपोक्लोराईट बहुत ही तेज बेस रसायन यानि कड़्वा होता है। यही कड़्वापन वायरसोँ और किटाणुओँ के लिये जहर का काम करता है। हमारे दैनिक प्रयोग के साबुनोँ मेँ भी सोडीयम-हाईड्रोक्साईड नामक बेसिक रसायन होता है जो किटाणु और विषाणु नाशक होता है। तभी तो बार-बार साबुन से हाथ धोने के लिए कहा जाता है।

Na का मतलब सोडियम, O का मतलब औक्सीजन और Cl का का मतलब कलोरीन है। पानी के साथ मिलने पर यह रसायन +Na+1 सोडियम  और -OCl-1 ओक्सोक्लोराईट आयनोँ और HOCl  हाईपोक्लोरस एसिड मेँ विघटित हो जाता है।

यह रसायन तेज ब्लीचिंग अजेंट है। पानी के साथ सम्पर्क होने पर यह तेजी से प्रतिक्रिया करता है। जब इस रसायन से पोंचा लगाते हैँ या इसे सप्रे मशीन से स्प्रे  करके छिडकते हैँ तो क्लोरीन और औक्सीजन गैस की मिली जुली तीव्र गंध उत्पन्न होती है। इस से ऐसा लगता है जैसे नाक मेँ सूईयाँ चुभ रही हो। इसके छिड़्काव से जमीन और हवा मेँ जो भी किटाणु और वायरस होते हैँ, वे मर जाते हैँ।

HOCl वायरसोँ के चर्बी से बने बाह्य आवरण को भेद देता है। इसके बाद -OCl-1 आयन वायरस के अंदर घुस जाते हैँ और जो प्रोटीन से निर्मित जेनेटिक मटीरियल वायरस के अंदर होता है उसे ये -OCl-1 आयन तोड़ देते हैँ। इससे वायरस के जीनोम मेँ परिवर्तन हो जाता है जिससे वायरस मर जाता है। पर यह तभी तक होता है जब तक वायरस बाहरी वातावरण मेँ होता है जैसे किसी भी प्रकार के धरातल  पर। एक बार यदि वायरस श्वासन प्रणाली के माध्यम से फेफड़ोँ मेँ घुस जाता है, तब केवल डाक्टरी इलाज़ ही एकमात्र उपाय है।
  
इस लिये यदि बसोँ, ट्रेनोँ, दरवाजोँ के हेंडिलोँ, फर्श, बाथरूमोँ, टोयालटस , रेलिंगोँ, पद-सोपानोँ, गलि योँ, नालियोँ के उपरलिफ्ट्स के अंदर-बाहर,  1 प्रतिशत मतलब 100 लीटर साफ पानी मेँ एक लीटर और 10 लीटर पानी मेँ 100 मिलिलीटर के हिसाब से यदि सांद्र (concentrated) सोडियम हाईपोक्लोराईट रसायन मिला कर स्प्रे किया जाये और आधा घंटा तक इस रसायन को यथा स्थिति धरातल  पर पड़ा रहने दिया जाये तो सब प्रकार के किटाणु, विषाणु और वायरस मर जाते हैँ। बस अड्डोँ, रेलवे स्टेशनोँ, हवाई अड्डोँ के वेटिंग रूम्स, स्नानागरोँ और टोयालेट्स को दिन मेँ बार बार सेनेटाईज करने की नितांत आवश्यक्ता है।

पुलिस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी दिन रात पसीने बहा कर सड़कोँ और चौराहोँ पर अपनी ड्युटि दे रहे हैँ। हो सकता है कोरोना वाईरस वातावरण मेँ  सड़कोँ और चौराहोँ पर भी हो। इससे पुलिस भी खतरे मेँ पड सकती है। सरकार को चाहिये कि स्प्रे मशीनोँ के माध्यम प्रतिदिन से उन स्थानोँ को भी सेनेटाईज करवाए , जहाँ पुलिस के जवान सतत् ड्युटि पर रहते हैँ।

इस के अतिरिक्त अस्पतालों, डाकघरोँ, डाक थैलोँ, डाक ग़ाड़ियोँ, बैंकोँ, स्कूलोँ, कालेजोँ, युनिवर्सिटियोँ, सरकारी कार्यालयोँ, कार पार्किंग्स को भी सोडियम-हाईपोक्लोराईट के घोल से सेनीटाईज करना उपयुक्त होगा।

शहरों में जितने भी स्लम एरिआज या झोंपड़ पट्टी के इलाके हैं, वहाँ विशेष रूप से सोडियम हाइपोक्लोराइट केमिकल का लगातार छिड़काव किया जाए| 

सोडियम-हाईपोक्लोराईट के आधा प्रतिशत से ले कर एक प्रतिशत घोल मेँ डुबा कर तौलीये, गिलाफ और चादर वगैरह भी साफ किये जा सकते हैँ। परंतु यह भी ध्यान मेँ रखा जाए कि यह रसायन रंग उड़ाने वाला तत्व है, रंगीन कपड़े इसमेँ न डुबाए जाएँ।

जहाँ  यह रसायन किटाणुओँ और वायरसोँ को मारने का काम करता है, वहीँ दूसरी ओर इस की गंध मेँ अधिक देर रहने से नाक और गले मेँ एलर्जी की अनुभूति हो सकती है। ऐसा इस रसायन के पानी के साथ रिएक्शन करने  से क्लोरीन गैस के अधिक मात्रा मेँ उत्सर्जन के कारण होता है।

इसलिए इस रसायन का प्रयोग अत्यंत सावधानी से करना चाहिये। छिडकाव करते समय मुंह पर मास्क या कपड़ा बांध लेना चाहिये और  आंखो पर चश्मा लगा लेना चाहिये ताकि यह रसायन या इससे निकलने वाली क्लोरीन गैस आंखोँ मेँ न जाए। अमोनियाँ रसायन से युक्त पदर्थोँ के साथ इस सोडियम-हाईपोक्लोराईट रसायन को न मिलाया जाये अन्यथा जहरीली अमोनिया गैस निकलेगी।

सोडियम-हाईपोक्लोराईट को बच्चोँ की पहुंच से दूर रखना चाहिये। यह रसायन आंख मेँ नहीँ  गिरना चाहिये नहीँ तो आंखे खराब हो सकती है।

भारतीय लोगोँ मेँ चलते-फिरते  नाक छिनकने ( excreting nasal mucous) और थूकते (Spit) रहने की बहुत बुरी आदत है। इस आदत को भी सुधारना होगा। अन्यथा अब गर्मी आने वाली है। गर्मी मेँ मक्खियाँ पनपती है। यदि मक्खियाँ कोरोना वायरस युक्त थूक, बलगम या नासिका स्राव पर बैठेगी तो इस वायरस का प्रसार भयनाक तरीके से हो सकता है। इससे अभी तक इस महामारी से निबटने के जो उपक्रम सरकार के द्वारा अभी तक किये गए हैँ उन पर पानी फिर जाएगा।

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